राज्यसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही से कोई बच नहीं सकता और जरूरत पड़ी तो गृह मंत्री को भी सदन में जवाब देने के लिए "खींचकर बाहर लाएंगे"। एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के बीच सरकार पर विपक्ष का हमला संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाया गया है। लोकसभा से पारित होने के बाद इसे राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया। बहस के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष इस कानून का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि वह चाहता है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर सरकार केवल कानून बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानने की बजाय वास्तविक जवाबदेही भी तय करे। खरगे ने कहा कि देशभर में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। लाखों छात्रों की मेहनत पर पानी फिरा है और कई भर्ती परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं। ऐसे में केवल नया कानून लाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई है। इसी दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर सदन में आकर जवाब दें। उन्होंने कहा कि अगर कोई जवाब देने से बचने की कोशिश करेगा तो विपक्ष उसे "खींचकर बाहर लाएगा" और जवाब मांगेगा। उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल काफी गर्म हो गया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल अपने संबोधन में खरगे ने कहा कि पेपर लीक का मामला केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब छात्रों के साथ अन्याय हुआ और कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि देश के युवा लगातार पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। सरकार को यह बताना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल कानून बनाने के अलावा कौन-कौन से प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। खरगे ने यह भी कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार छात्रों का विश्वास दोबारा जीतने के लिए ठोस व्यवस्था बनाए। उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना केवल सख्त सजा का प्रावधान समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। सत्ता पक्ष के सांसदों ने विपक्ष के आरोपों का विरोध किया और कहा कि सरकार ने पहली बार पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कानून लाने की पहल की है। सरकार ने क्या कहा? सरकार की ओर से कहा गया कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना है। इसके जरिए पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोहों और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर पहले से अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने यह भी कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है और परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी तथा कानूनी दोनों स्तरों पर सुधार किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि नया कानून भविष्य में इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगा। सदन में बढ़ा राजनीतिक तापमान, छात्रों का मुद्दा बना केंद्र राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांगता रहा, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राजनीतिक आरोप लगाने का आरोप लगाया। अध्यक्ष को कई बार सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी। हाल के दिनों में पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा संसद के दोनों सदनों में लगातार उठता रहा है। विपक्ष का कहना है कि युवाओं का भरोसा तभी लौटेगा जब दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई होगी और पूरी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाएगा। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि नया कानून इसी दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेपर लीक का मुद्दा अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह रोजगार, सरकारी भर्ती और युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बन चुका है। इसलिए संसद में इस पर हुई बहस का राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल एंटी पेपर लीक विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं। एक ओर सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। जवाबदेही तय करना, जांच को मजबूत करना और छात्रों का भरोसा बहाल करना भी उतना ही जरूरी है। राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे का "खींचकर बाहर लाएंगे" वाला बयान पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।