दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से जुड़े मामले में बरी कर दिया है। अदालत के इस फैसले के साथ करीब तीन साल से चल रहा यह चर्चित मामला एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पर पहुंच गया। मामले में अदालत ने क्या फैसला सुनाया? दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह और मामले के सह-आरोपी एवं पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत का यह फैसला अंतिम दलीलें पूरी होने के बाद सुनाया गया। इससे पहले अदालत ने जुलाई 2026 में फैसला सुरक्षित रख लिया था और 3 अगस्त को निर्णय सुनाने की तारीख तय की थी। यह मामला देश के सबसे चर्चित खेल विवादों में से एक रहा है। महिला पहलवानों ने आरोप लगाया था कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया। इन आरोपों के बाद पूरे देश में बड़ा विवाद खड़ा हुआ था और कई नामी पहलवानों ने न्याय की मांग को लेकर आंदोलन किया था। अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह को इस मामले में कानूनी राहत मिल गई है। हालांकि, अदालत के फैसले का विस्तृत आदेश आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन आधारों पर उन्हें बरी किया गया। पहलवानों के आंदोलन से शुरू हुआ था पूरा विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी, जब देश की कई अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवानों ने तत्कालीन भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। ओलंपिक और विश्व स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं कई महिला खिलाड़ियों ने दावा किया था कि उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबा धरना शुरू हुआ, जिसमें कई प्रसिद्ध पहलवान भी शामिल हुए। यह आंदोलन कई महीनों तक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना रहा। खिलाड़ियों ने निष्पक्ष जांच, एफआईआर दर्ज करने और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत में गवाहों के बयान, सबूतों की जांच और दोनों पक्षों की दलीलों की लंबी प्रक्रिया चली। आखिरकार अगस्त 2026 में अदालत ने अपना फैसला सुनाया। फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण शरण सिंह? अदालत से राहत मिलने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें शुरू से न्यायपालिका पर भरोसा था। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप एक साजिश का हिस्सा थे और उन्होंने कभी खुद को दोषी नहीं माना। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले ने उनकी बात को सही साबित किया है। फैसले के बाद उनके समर्थकों ने उनका स्वागत किया और कई जगह खुशी भी जताई गई। कुछ स्थानों पर समर्थकों ने फूल बरसाकर उनका अभिनंदन किया। हालांकि, इस मामले से जुड़े आंदोलन ने भारतीय खेल व्यवस्था, महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल संस्थाओं में जवाबदेही को लेकर पूरे देश में बड़ी बहस छेड़ी थी। इसी कारण यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और खेल जगत से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी बन गया। वहीं, जिन महिला पहलवानों ने शिकायत दर्ज कराई थी, उनकी ओर से फैसले पर आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आगे क्या हो सकता है? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ संबंधित पक्ष को उच्च अदालत में अपील करने का अधिकार होता है। इसलिए यदि शिकायतकर्ता अदालत के फैसले से असहमत होते हैं तो वे कानून के अनुसार आगे की न्यायिक प्रक्रिया अपना सकते हैं। राजनीतिक दृष्टि से भी इस फैसले को अहम माना जा रहा है। बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय तक भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उनका प्रभाव माना जाता है। ऐसे में अदालत के इस फैसले के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं। दूसरी ओर, यह मामला भारतीय खेल प्रशासन के लिए भी एक बड़ा सबक माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और खेल संघों की जवाबदेही को लेकर कई सुधारों की मांग उठी है। विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे अदालत का फैसला जो भी हो, खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी माहौल सुनिश्चित करना खेल संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी बनी रहेगी। फिलहाल अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह को इस बहुचर्चित यौन शोषण मामले में बड़ी कानूनी राहत मिल गई है। हालांकि यदि किसी पक्ष की ओर से उच्च अदालत में अपील की जाती है तो इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है।