भारत-चीन सीमा (LAC) के पास चीन ने अपने दो अहम एयरबेस पर कम से कम 12 अत्याधुनिक J-20 स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। हाल ही में सामने आई व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरों से इस तैनाती का खुलासा हुआ है, जिसे सीमा क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा? सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार चीन ने शिनजियांग स्थित होटन (Hotan) एयरबेस और तिब्बत के दामशुंग (Damxung) एयरबेस पर J-20 स्टील्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। तस्वीरों में होटन एयरबेस पर आठ J-20 फाइटर जेट दिखाई दिए, जबकि दामशुंग एयरबेस पर चार J-20 विमान मौजूद थे। दोनों एयरबेस मिलाकर कुल 12 J-20 फाइटर जेट की मौजूदगी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यह हाल के वर्षों में भारत की सीमा के सामने चीन द्वारा किए गए सबसे बड़े J-20 तैनाती अभियानों में से एक माना जा रहा है। इन तस्वीरों को जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत के दौरान लिया गया था, जिससे पता चलता है कि चीन लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी वायु शक्ति को मजबूत कर रहा है। होटन एयरबेस रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह उत्तरी लद्दाख में भारतीय वायुसेना के दौलत बेग ओल्डी (DBO) एयरबेस के अपेक्षाकृत करीब स्थित है। वहीं दामशुंग एयरबेस तिब्बत में होने के कारण LAC के मध्य सेक्टर के लिए अहम माना जाता है। ऐसे में दोनों जगहों पर J-20 की तैनाती चीन की सैन्य तैयारी को दर्शाती है। J-20 फाइटर जेट क्यों है खास? J-20 चीन का पांचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) का स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना मुश्किल हो। यही वजह है कि इसे चीन की वायुसेना का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। इस विमान की प्रमुख खूबियां हैं: स्टील्थ तकनीक, जिससे रडार पर पकड़ना कठिन होता है। लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता। आधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम। हवा से हवा में मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलें ले जाने की क्षमता। नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली के साथ काम करने की सुविधा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विमानों की तैनाती का उद्देश्य सीमा क्षेत्र में चीन की तेज प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर कम समय में सैन्य कार्रवाई करने की तैयारी रखना हो सकता है। हालांकि इस तैनाती को लेकर चीन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। भारत के लिए इसका क्या मतलब है? भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से LAC पर तनाव बना हुआ है। पूर्वी लद्दाख में 2020 के बाद दोनों देशों ने सीमा के पास सैन्य ढांचे, सड़कों, एयरबेस और हथियारों की तैनाती लगातार बढ़ाई है। ऐसे में J-20 जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की मौजूदगी निश्चित रूप से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की नजर में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल किसी विमान की तैनाती से शक्ति संतुलन पूरी तरह नहीं बदल जाता। भारतीय वायुसेना के पास राफेल, सुखोई-30MKI, मिराज-2000 और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम जैसी मजबूत क्षमताएं मौजूद हैं। इसके अलावा भारत ने सीमा के पास अपने एयरबेस, रडार नेटवर्क और निगरानी व्यवस्था को भी पहले से काफी मजबूत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सैन्य गतिविधि का आकलन केवल विमानों की संख्या से नहीं किया जाता। पायलटों का प्रशिक्षण, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल क्षमता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और खुफिया जानकारी भी समान रूप से महत्वपूर्ण होती है। सीमा पर बढ़ रही सैन्य गतिविधियां हाल के वर्षों में चीन ने तिब्बत और शिनजियांग क्षेत्र में कई सैन्य ठिकानों का आधुनिकीकरण किया है। नए रनवे, हैंगर, मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही चीन सीमा क्षेत्रों में आधुनिक लड़ाकू विमान, ड्रोन और निगरानी उपकरण भी लगातार बढ़ा रहा है। दूसरी ओर भारत भी सीमा क्षेत्रों में सड़क, सुरंग, एयरफील्ड और सैन्य बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित कर रहा है। भारतीय वायुसेना नियमित रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभ्यास करती रहती है और आवश्यकता पड़ने पर कम समय में सैन्य संसाधनों की तैनाती की क्षमता भी बढ़ाई गई है। आगे क्या देखना होगा? फिलहाल सैटेलाइट तस्वीरों से चीन की सैन्य गतिविधियों का संकेत जरूर मिला है, लेकिन इससे किसी तत्काल सैन्य टकराव की पुष्टि नहीं होती। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत और चीन दोनों एक-दूसरे की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। आने वाले समय में यदि इस क्षेत्र में और सैन्य संसाधनों की तैनाती होती है या दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इतना तय है कि LAC के आसपास चीन की यह तैनाती भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण निगरानी का विषय बनी हुई है और सीमा क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों देशों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है।