उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में गोलियां चलवाई गईं और दंगे हुए, उन्हें कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार जनहित के सभी मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है। विधानसभा सत्र से पहले विपक्ष पर सीएम योगी का हमला उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वदलीय बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सभी दलों से सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है और यहां जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने बिना किसी नेता का नाम लिए कहा कि जो लोग अपने शासनकाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहे, जिनके समय में निर्दोष लोगों पर गोलियां चलीं, दंगे हुए और अपराधियों का मनोबल बढ़ा, वे आज कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता पिछले और वर्तमान शासन के बीच का अंतर अच्छी तरह समझती है। उनके अनुसार प्रदेश में अब कानून का राज स्थापित हुआ है और अपराधियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जा रही है। कानून व्यवस्था और विकास को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की पहचान तेजी से बदली है। पहले राज्य की छवि अपराध, दंगे और माफिया के कारण खराब होती थी, लेकिन अब निवेश, उद्योग और विकास के कारण प्रदेश नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हर नागरिक को सुरक्षित वातावरण देना है। कानून व्यवस्था मजबूत होने का असर निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है और नई परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। सीएम योगी ने यह भी कहा कि सरकार ने माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया है। अवैध कब्जों पर कार्रवाई, अपराधियों की संपत्तियों पर बुलडोजर और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई जैसी नीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। "जिन्होंने गोलियां चलवाई..." बयान का क्या है संदर्भ? मुख्यमंत्री के "जिन्होंने गोलियां चलवाई..." वाले बयान को समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। भाजपा लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि पिछली सरकारों के दौरान दंगे, अपराध और पुलिस कार्रवाई के कई विवादित मामले सामने आए थे। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के शासनकाल में ऐसी घटनाएं हुईं, वे आज कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब पुराने दौर और वर्तमान व्यवस्था का अंतर खुद देख रही है। हालांकि समाजवादी पार्टी लगातार यह आरोप लगाती रही है कि वर्तमान सरकार कानून व्यवस्था के मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करती है और वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने का प्रयास करती है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। मानसून सत्र में कई अहम मुद्दों पर हो सकती है चर्चा उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े विषयों को सदन में रख सकती है। वहीं विपक्ष बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, महंगाई, बिजली व्यवस्था, कानून व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि वे सदन की गरिमा बनाए रखें और जनता से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा करें। उन्होंने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और लोकतांत्रिक परंपराओं का पूरी तरह सम्मान करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मानसून सत्र काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की कोशिश करेगा, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों और फैसलों को लेकर आक्रामक रुख अपनाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्र शुरू होने से पहले दिए गए बयान से साफ संकेत मिलता है कि विधानसभा के भीतर कानून व्यवस्था, अपराध, विकास और पिछली सरकारों के कामकाज को लेकर जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। भाजपा जहां अपने शासनकाल को सुशासन और विकास का मॉडल बताने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठाएगा। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान और बढ़ने की पूरी संभावना है।