संसद में मंगलवार को कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे Gen-Z अंदाज के नारों का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने संशोधन विधेयक को केवल "जुमला" करार दिया और कहा कि इससे आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला है। संसद में Gen-Z के नारों का जिक्र राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने भाषण में युवाओं की भाषा और सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी अपनी बात अलग अंदाज में रखती है और कई बार उनके नारे भी राजनीति का हिस्सा बन जाते हैं। इसी दौरान उन्होंने "कुचु-पुचु इस्तीफा दे दो" जैसे Gen-Z शैली के नारे का जिक्र किया। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर तक हलचल भी देखने को मिली। हुड्डा ने कहा कि सरकार को केवल प्रचार पर ध्यान देने के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं पर काम करना चाहिए। संशोधन विधेयक पर सरकार को घेरा "यह सिर्फ जुमला है" दीपेंद्र हुड्डा ने चर्चा के दौरान संबंधित संशोधन विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इसे बड़ा सुधार बताकर पेश कर रही है, लेकिन वास्तविकता इससे अलग है। उनके अनुसार यह विधेयक आम नागरिकों को कोई ठोस राहत नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार बड़े दावे करती है, लेकिन जमीन पर उनका असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि केवल कानून में बदलाव का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके परिणाम भी जनता तक पहुंचने चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हुई तीखी बहस हुड्डा के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने उनकी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। इसके बाद सदन में कुछ समय के लिए तीखी नोकझोंक भी हुई। हालांकि, सभापति के हस्तक्षेप के बाद चर्चा फिर सामान्य रूप से आगे बढ़ी। विपक्षी दलों ने भी सरकार से विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर जवाब मांगा। उनका कहना था कि कानून बनाने से पहले सभी पक्षों की राय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि संशोधन का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है। राजनीतिक और सोशल मीडिया में बढ़ी चर्चा दीपेंद्र हुड्डा के भाषण का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। खासकर "कुचु-पुचु इस्तीफा दे दो" वाले बयान को लेकर कई लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे युवाओं की भाषा से जुड़ा नया राजनीतिक अंदाज बताया, जबकि कुछ ने इसे केवल राजनीतिक टिप्पणी माना। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आज सोशल मीडिया और Gen-Z संस्कृति का प्रभाव राजनीतिक भाषणों में भी साफ दिखाई देने लगा है। नेताओं द्वारा युवाओं की भाषा और ट्रेंड का इस्तेमाल अब पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहा है। फिलहाल संशोधन विधेयक पर संसद में चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर आगे भी बहस देखने को मिल सकती है। वहीं, दीपेंद्र हुड्डा का यह बयान राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह भी पढ़ें- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, PM मोदी मांगें माफी: राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखीं तीन मांगें