केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ( कॉकरोच जनता पार्टी ) से जुड़े कुछ लोगों द्वारा आयोजित एक लग्जरी जश्न चर्चा का विषय बन गया। इस पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के इस्तीफे का जश्न मनाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर ध्यान देना अधिक जरूरी है। CJP के जश्न पर क्यों हो रही है चर्चा? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें CJP से जुड़े लोगों को एक होटल में जश्न मनाते हुए दिखाया गया। इन तस्वीरों को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी खुशी जाहिर करना बताया, जबकि कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब देश में शिक्षा और छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं, तब इस तरह का लग्जरी जश्न मनाना कितना उचित है। यही वजह है कि यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। सोनम वांगचुक ने क्या कहा? शिक्षा सुधार को बताया सबसे बड़ा मुद्दा सोनम वांगचुक ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी मंत्री के इस्तीफे से केवल एक अध्याय खत्म होता है, लेकिन असली चुनौती शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि अगर छात्र, शिक्षक और अभिभावक बेहतर शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं, तो सभी को मिलकर सुधार की दिशा में काम करना चाहिए। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति के जाने या आने से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा कैसे बढ़ाया जाए। इस्तीफे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। विपक्ष ने इसे छात्रों के दबाव और लगातार उठ रहे सवालों का असर बताया, जबकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की राय बंटी हुई दिखाई दी। कुछ यूजर्स ने इस्तीफे का स्वागत किया, जबकि कई लोगों ने कहा कि केवल इस्तीफा देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। आगे क्या? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजर केंद्र सरकार के अगले फैसले पर है। नया शिक्षा मंत्री कौन होगा और शिक्षा से जुड़े लंबित मुद्दों पर क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर जल्द ही तस्वीर साफ हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा केंद्र छात्रों का हित और शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। वहीं, सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया ने भी यही संदेश देने की कोशिश की है कि किसी राजनीतिक बदलाव से अधिक जरूरी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।यह भी पढ़ें:- CJP का बड़ा दावा: केंद्र से बातचीत सफल, प्रदर्शनकारियों पर No FIR का आश्वासन