अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उत्पादों के साथ कथित भेदभाव का जवाब है, जबकि कनाडा ने इसे दोनों देशों के व्यापार समझौतों के खिलाफ बताया है। ट्रंप प्रशासन ने क्यों लगाया 50 फीसदी टैरिफ? व्हाइट हाउस के अनुसार, यह फैसला 1930 के Tariff Act की Section 338 के तहत लिया गया है। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कनाडा ने अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यापार नीतियां अपनाई हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों और किसानों को नुकसान हुआ है। इसी वजह से लगभग 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर 50% अतिरिक्त शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। यह नया टैरिफ 19 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। किन-किन उत्पादों पर पड़ेगा असर? टैरिफ की जद में आने वाले प्रमुख उत्पाद नई घोषणा के अनुसार कई कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: शराब (Wine, Beer और अन्य Alcoholic Beverages) डेयरी उत्पाद चीज़ (Cheese) सीमेंट हॉकी उपकरण बीज (Seeds) कपड़े और अन्य चयनित उपभोक्ता वस्तुएं कुछ ऑटोमोबाइल से जुड़े उत्पाद हालांकि ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और कुछ अन्य श्रेणियों को इस अतिरिक्त टैरिफ से बाहर रखा गया है। कनाडा की क्या रही प्रतिक्रिया? कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच मौजूद मुक्त व्यापार व्यवस्था की भावना के विपरीत है। कनाडा ने संकेत दिया है कि वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर अपने उद्योगों और कारोबार की सुरक्षा के लिए जवाबी कदम भी उठा सकता है। वैश्विक व्यापार और उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव दोनों देशों के कारोबार और उपभोक्ताओं पर असर डाल सकता है। आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ने से कुछ उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा उत्तर अमेरिकी सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। कई उद्योग संगठनों ने दोनों सरकारों से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है ताकि व्यापारिक अनिश्चितता कम हो सके। आगे क्या होगा? फिलहाल ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि 50% टैरिफ निर्धारित समय के अनुसार लागू किया जाएगा। दूसरी ओर कनाडा लगातार कूटनीतिक वार्ता के जरिए इस विवाद का समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। यदि दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले महीनों में यह व्यापारिक विवाद और गहरा सकता है तथा उत्तर अमेरिकी बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।