शिक्षा नीति को लेकर हालिया राजनीतिक बहस के बीच अब E20 ईंधन भी चर्चा का विषय बनता दिख रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के एक बयान के बाद यह संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की E20 नीति को लेकर विपक्ष सवाल उठा सकता है, हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक अभियान या घोषणा नहीं हुई है। केजरीवाल के बयान से क्यों बढ़ी चर्चा? अरविंद केजरीवाल ने अपने हालिया बयान में केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों पर सवाल उठाते हुए संकेत दिए कि शिक्षा के बाद अब आम लोगों से जुड़े दूसरे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में E20 ईंधन नीति को लेकर नई बहस की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, केजरीवाल ने अपने बयान में E20 नीति पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगे विपक्ष की रणनीति का हिस्सा बन सकता है। E20 ईंधन क्या है और सरकार का उद्देश्य क्या है? E20 का मतलब क्या है? E20 ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को एथेनॉल उत्पादन से लाभ मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। सरकार लंबे समय से देशभर में चरणबद्ध तरीके से E20 ईंधन को बढ़ावा दे रही है और वाहन निर्माताओं से भी E20-अनुकूल इंजन विकसित करने को कहा गया है। विपक्ष किन मुद्दों पर सवाल उठा सकता है? यदि E20 राजनीतिक मुद्दा बनता है तो विपक्ष निम्न बिंदुओं पर सरकार से जवाब मांग सकता है: सभी वाहन E20 के अनुकूल हैं या नहीं। पुराने वाहनों के मालिकों पर इसका क्या असर पड़ेगा। माइलेज और रखरखाव की लागत में कोई बदलाव होगा या नहीं। देशभर में E20 ईंधन की उपलब्धता कितनी है। फिलहाल इन मुद्दों पर कोई आधिकारिक राजनीतिक अभियान शुरू नहीं हुआ है। सरकार और गडकरी का पक्ष केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि एथेनॉल आधारित ईंधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और प्रदूषण कम करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। अब यह देखना होगा कि विपक्ष इस विषय को किस तरह राजनीतिक मुद्दा बनाता है और सरकार उसके जवाब में क्या रुख अपनाती है। आगे क्या? फिलहाल E20 को लेकर किसी नए सरकारी फैसले या विपक्षी आंदोलन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन केजरीवाल के हालिया बयान के बाद इस विषय पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। आने वाले दिनों में यदि विपक्ष इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाता है, तो E20 नीति एक नई राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकती है। फिलहाल सभी पक्षों के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।