दतिया (मध्य प्रदेश) और मांजलपुर (गुजरात) विधानसभा उपचुनावों की मतगणना में शुरुआती रुझानों में भाजपा बढ़त बनाए हुए है, जबकि बिहार की बांकीपुर सीट पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मजबूत प्रदर्शन कर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। मतगणना जारी है और अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदल सकती है। दतिया और मांजलपुर में भाजपा की बढ़त, बांकीपुर बना सबसे बड़ा मुकाबला सोमवार सुबह तीन राज्यों की विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना शुरू हुई। सबसे अधिक चर्चा बिहार की बांकीपुर सीट को लेकर है, जहां पहली बार चुनाव लड़ रहे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शुरुआती राउंड से ही भाजपा को कड़ी चुनौती दी। कई राउंड की गिनती के बाद वह बढ़त बनाते दिखाई दिए, जिससे राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। वहीं मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुरुआती रुझानों में कांग्रेस से आगे चल रहे हैं। यह सीट इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसका असर राज्य की राजनीति और भाजपा-कांग्रेस दोनों के मनोबल पर पड़ सकता है। गुजरात की मांजलपुर सीट पर भी भाजपा ने शुरुआती दौर में बढ़त बनाई हुई है। पार्टी इस सीट को अपने मजबूत गढ़ के रूप में देखती है और शुरुआती रुझानों ने उसके समर्थकों का उत्साह बढ़ाया है। बांकीपुर पर सबकी नजर, प्रशांत किशोर की पहली चुनावी परीक्षा बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट इस उपचुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट बन गई है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनाव मैदान में उतरे हैं। लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम करने के बाद अब वह सीधे जनता से वोट मांग रहे हैं। शुरुआती रुझानों में प्रशांत किशोर के बेहतर प्रदर्शन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। यदि यह बढ़त अंत तक कायम रहती है तो इसे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। दूसरी ओर भाजपा अपने लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश कर रही है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी इस मुकाबले में मौजूद है, लेकिन शुरुआती रुझानों में मुख्य मुकाबला भाजपा और जन सुराज के बीच दिखाई दे रहा है। चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट का परिणाम केवल एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है। दतिया सीट क्यों है इतनी महत्वपूर्ण? मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुए उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। इस सीट पर चुनाव कई राजनीतिक कारणों से कराया गया था और दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंकी। भाजपा के लिए यह सीट अपने संगठन की मजबूती दिखाने का अवसर है, जबकि कांग्रेस इसे सत्ता पक्ष के खिलाफ जनसमर्थन साबित करने का मौका मान रही है। शुरुआती रुझानों में भाजपा की बढ़त ने पार्टी को राहत दी है, लेकिन मतगणना पूरी होने तक किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मतगणना जारी, अंतिम नतीजों का इंतजार मतगणना कई राउंड में पूरी की जा रही है। हर राउंड के साथ उम्मीदवारों के बीच अंतर घट-बढ़ सकता है। चुनाव आयोग की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना जारी है। राजनीतिक दल लगातार अपने एजेंटों के माध्यम से हर राउंड की जानकारी जुटा रहे हैं। कई स्थानों पर समर्थक मतगणना केंद्रों के बाहर जुटे हुए हैं और परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती रुझानों को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। डाक मतपत्रों की गिनती, ईवीएम के विभिन्न राउंड और कुल मतों की संख्या के आधार पर परिणाम बदल सकते हैं। इसलिए आधिकारिक घोषणा आने तक इंतजार करना जरूरी है। इन उपचुनावों के राजनीतिक मायने इन तीनों विधानसभा सीटों के उपचुनाव भले ही संख्या के लिहाज से छोटे हों, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बिहार में बांकीपुर का परिणाम जन सुराज पार्टी के भविष्य और प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्वीकार्यता का संकेत देगा। मध्य प्रदेश में दतिया का नतीजा भाजपा और कांग्रेस की संगठनात्मक ताकत की परीक्षा माना जा रहा है। गुजरात के मांजलपुर में भाजपा अपनी पारंपरिक बढ़त बरकरार रखना चाहती है। यदि बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीत दर्ज करते हैं, तो यह उनकी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि होगी और आगामी चुनावों में उन्हें मजबूत राजनीतिक आधार मिल सकता है। वहीं भाजपा यदि दतिया और मांजलपुर दोनों सीटें जीतती है, तो पार्टी इसे अपने संगठन और जनसमर्थन की पुष्टि के रूप में पेश करेगी। फिलहाल तीनों सीटों पर मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में दतिया और मांजलपुर में भाजपा आगे दिखाई दे रही है, जबकि बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अंतिम परिणाम चुनाव आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।