भारतीय टीम के चयन और युवा खिलाड़ियों को अवसर देने के मुद्दे पर पूर्व क्रिकेटर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह पहले संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के साथ लगातार मौके नहीं देकर उनके करियर को नुकसान पहुंचाया गया, उसी तरह अब एक और प्रतिभाशाली खिलाड़ी के साथ भी वैसा ही व्यवहार नहीं होना चाहिए। क्या है पूरा मामला? टीम इंडिया के चयन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल के दिनों में युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन और उन्हें मिलने वाले अवसरों पर क्रिकेट विशेषज्ञों तथा पूर्व खिलाड़ियों की अलग-अलग राय सामने आ रही है। इसी बीच एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की। उनका कहना है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लगातार मौके देना जरूरी है, क्योंकि बार-बार टीम से अंदर-बाहर करने की नीति किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास और करियर पर नकारात्मक असर डाल सकती है। संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी का क्यों हुआ जिक्र? संजू सैमसन का उदाहरण पूर्व क्रिकेटर ने संजू सैमसन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें कई मौकों पर निरंतर अवसर नहीं मिले। जब भी उन्हें टीम में जगह मिली, अक्सर कुछ मैचों के बाद बाहर कर दिया गया। इससे वह अपनी क्षमता के अनुरूप लंबी पारी नहीं खेल सके। वैभव सूर्यवंशी का भी लिया नाम उन्होंने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उभरते खिलाड़ियों को धैर्य और भरोसे की जरूरत होती है। यदि किसी खिलाड़ी को शुरुआती दौर में ही पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता, तो उसका विकास प्रभावित हो सकता है। अब किस खिलाड़ी को लेकर जताई चिंता? पूर्व क्रिकेटर ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि चयनकर्ता और टीम प्रबंधन को अब एक और युवा खिलाड़ी के साथ वही गलती नहीं दोहरानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि किसी खिलाड़ी में प्रतिभा है, तो उसे लगातार मौके देकर खुद को साबित करने का समय मिलना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीम चयन पूरी तरह प्रदर्शन, टीम संयोजन और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाता है, लेकिन निरंतरता का अभाव कई खिलाड़ियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। टीम चयन पर क्यों बढ़ रही है बहस? भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नए खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने सर्वश्रेष्ठ संयोजन चुनने की चुनौती रहती है। फिर भी क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को केवल एक-दो मैचों के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। उन्हें पर्याप्त समय और भरोसा मिलने पर ही उनकी वास्तविक क्षमता सामने आती है। आगे क्या देखना होगा? आने वाले दौरों और आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए टीम चयन पर सभी की नजर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को कितनी निरंतरता देता है और क्या चयन नीति में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाती है। यदि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लगातार अवसर मिलते हैं, तो इससे भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ और भविष्य दोनों मजबूत हो सकते हैं।