ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन और नए समुद्री मार्ग को लेकर ओमान के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। यदि यह समझौता पूरा होता है तो जहाजों के लिए एक नया नेविगेशन रूट और ट्रैफिक व्यवस्था लागू हो सकती है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं होगा कि पुराने मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। होर्मुज को लेकर क्या है नया समझौता? मध्य पूर्व में कई महीनों से जारी तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ी कूटनीतिक गतिविधि देखने को मिल रही है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, इस बातचीत का उद्देश्य जहाजों की आवाजाही के लिए एक नई "ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम" (Traffic Separation Scheme) तैयार करना है। इसका मतलब यह है कि समुद्री जहाजों के आने-जाने के लिए नए लेन या रास्ते तय किए जा सकते हैं, जिससे सुरक्षा बढ़े और दोनों देशों की समुद्री सीमाओं का बेहतर प्रबंधन हो सके। ईरान का कहना है कि नई व्यवस्था उसकी संप्रभुता और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर बनाई जाएगी। वहीं ओमान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी रहे। क्या बनेगा बिल्कुल नया समुद्री रास्ता? इस खबर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या होर्मुज में पूरी तरह नया रास्ता बनाया जाएगा? इसका जवाब है- अभी ऐसा तय नहीं हुआ है। अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार, बातचीत का मकसद नया कृत्रिम समुद्री मार्ग बनाना नहीं है। बल्कि जहाजों की आवाजाही के लिए मौजूदा जलडमरूमध्य के भीतर नई नेविगेशन लेन, ट्रैफिक व्यवस्था और सुरक्षित मार्ग तय करना है। यानी जहाज अलग तरीके से गुजर सकते हैं, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक स्थिति वही रहेगी। दुनिया के लिए होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का अधिकांश कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर असर दिखाई देता है। निवेशक और ऊर्जा कंपनियां लगातार इस मार्ग की स्थिति पर नजर बनाए रखते हैं। हाल के महीनों में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण इस जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा को लेकर कई बार चिंता जताई गई। इसी वजह से ओमान और ईरान के बीच नई व्यवस्था पर बातचीत तेज हुई है। समझौते से किसे होगा फायदा? यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है तो कई स्तर पर इसके सकारात्मक असर देखने को मिल सकते हैं। सबसे पहले जहाजों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकती है। इससे दुर्घटनाओं और सैन्य टकराव की आशंका कम होगी। दूसरा, तेल और गैस की सप्लाई पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की संभावना है। तीसरा, ओमान की मध्यस्थ की भूमिका और मजबूत होगी। लंबे समय से ओमान क्षेत्रीय विवादों में बातचीत कराने की भूमिका निभाता रहा है और इस समझौते में भी वही अहम कड़ी बना हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते के बाद भी क्षेत्र में पूरी तरह तनाव खत्म नहीं होगा। यदि भविष्य में फिर सैन्य टकराव बढ़ता है तो समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है। आगे क्या होगा? ईरान ने संकेत दिया है कि बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम दस्तावेज और उसकी शर्तों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। दोनों देशों की ओर से समझौते के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर अंतिम चर्चा चल रही है। इस बीच अमेरिका भी ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम होता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री गतिविधियां और मजबूत हो सकती हैं। फिलहाल इतना साफ है कि ओमान और ईरान के बीच होने वाली यह संभावित डील केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस समझौते की आधिकारिक घोषणा और उसकी शर्तों पर दुनिया की नजर रहेगी।