संसद के मानसून सत्र के दौरान CJP प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज का मुद्दा राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठा। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने जवाब देते हुए कहा कि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई होना स्वाभाविक है और "अगर एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल भी जाना पड़ेगा।" राज्यसभा में क्यों हुई तीखी बहस? राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग किया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर जवाब देने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। विपक्ष ने गृह मंत्री से भी सदन में बयान देने की मांग की। नड्डा ने क्या दिया जवाब? विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए राज्यसभा में सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून सबसे ऊपर होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्रदर्शन के नाम पर कानून का उल्लंघन करेगा या सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देगा तो पुलिस अपना काम करेगी। इसी दौरान नड्डा ने कहा, "अगर एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाना पड़ेगा।" उनके इस बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष का कहना था कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान है। विपक्ष ने सरकार पर लगाए ये आरोप विपक्षी दलों का कहना है कि CJP प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। उनका आरोप है कि कई प्रदर्शनकारियों को बिना पर्याप्त कारण हिरासत में लिया गया और विरोध की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास किया गया। विपक्ष ने यह भी कहा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब मांगा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही भी कई बार बाधित हुई। आगे क्या हो सकता है? CJP प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अब संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इस मामले में सरकार से विस्तृत जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है और पुलिस ने नियमों के अनुसार कार्रवाई की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही को और प्रभावित कर सकता है। यदि विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहता है तो सदन में फिर से हंगामे की संभावना बनी रह सकती है। वहीं सरकार लगातार यह कह रही है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। यह भी पढ़ें- चीन मॉडल का जिक्र कर पप्पू यादव ने सरकार को दी बड़ी सलाह, पेपर लीक पर कही यह बात