बिहार विधान परिषद की रिक्त हो रही सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आगामी चुनाव के तहत 9 सीटों पर नियमित चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव कराया जाना है। इसके लिए नामांकन की अंतिम तिथि 11 जून निर्धारित की गई है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। पार्टी की ओर से घोषित चार उम्मीदवारों में भोजपुरी फिल्म जगत के लोकप्रिय अभिनेता और गायक पवन सिंह का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। बीजेपी कार्यालय में हुआ भव्य स्वागत उम्मीदवार घोषित किए जाने के एक दिन बाद शनिवार को पवन सिंह पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। पहली बार विधान परिषद चुनाव के उम्मीदवार के रूप में पार्टी कार्यालय पहुंचे पवन सिंह ने वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ‘पार्टी मेरी मां है, मैं आजीवन सेवक रहूंगा’ मीडिया से बातचीत के दौरान पवन सिंह ने भावुक अंदाज में भाजपा नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, उसके लिए वे हमेशा ऋणी रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा उनके लिए केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि परिवार की तरह है। उन्होंने स्वयं को पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य जनता की सेवा करना है और वे पूरी निष्ठा के साथ इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। संजय सरावगी का भी जताया आभार पवन सिंह ने भाजपा नेता संजय सरावगी का विशेष रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन उन्हें लगातार मिलता रहा है और आगे भी वे संगठन के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। उनके इस बयान को पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी समीकरणों में नया मोड़ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पवन सिंह को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर व्यापक प्रभाव रखने वाले चेहरे को चुनावी मैदान में उतारा है। भोजपुरी क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए इस फैसले को भाजपा की रणनीतिक चाल माना जा रहा है। उनके नाम की घोषणा के बाद समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है, जबकि विपक्षी दल भी नए राजनीतिक समीकरणों का आकलन करने में जुट गए हैं। अब सभी की नजरें 11 जून पर टिकी हैं, जब नामांकन प्रक्रिया पूरी होगी और विधान परिषद चुनाव का मुकाबला और अधिक स्पष्ट रूप लेगा।