कांग्रेस ने छात्र आंदोलन के दौरान कथित पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की जिम्मेदारी तय हो सकती है, तो छात्रों पर कथित पेलेट गन चलाने के मामले में गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही क्यों नहीं तय की जा रही और उनका इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जा रहा। विपक्ष लगातार इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठा रहा है। पवन खेड़ा ने क्या कहा? कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जिस तरह बल प्रयोग के आरोप लगे हैं, वह बेहद गंभीर मामला है। उनका कहना था कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित विफलताओं के लिए जवाबदेही तय कर सकती है, तो कानून-व्यवस्था से जुड़े इस मामले में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। पवन खेड़ा ने सवाल किया कि छात्रों के खिलाफ कथित रूप से पेलेट गन, लाठीचार्ज और आंसू गैस जैसे उपाय किसके आदेश पर इस्तेमाल किए गए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हुए उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। कांग्रेस ने क्यों उठाया इस्तीफे का मुद्दा? कांग्रेस का कहना है कि हाल के छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई में जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। पार्टी का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ, जिसकी जिम्मेदारी आखिरकार गृह मंत्रालय पर आती है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यदि सरकार ने शिक्षा मंत्री के स्तर पर जवाबदेही तय की है, तो गृह मंत्रालय से जुड़े मामले में भी समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। पार्टी का कहना है कि केवल एक मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पेलेट गन विवाद क्या है? 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ था। इसके बाद विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। इस मुद्दे ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया और संसद में भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। हालांकि, इस मामले में एक वरिष्ठ दिल्ली पुलिस अधिकारी ने मीडिया रिपोर्टों में कहा कि उन्होंने पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी थी और न ही वह उस समय मौके पर मौजूद थे। दूसरी ओर, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने इस पूरे घटनाक्रम में बल प्रयोग के आरोपों की आंतरिक जांच शुरू करने की बात कही है। यानी मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। संसद में भी गूंजा मामला पेलेट गन विवाद संसद के दोनों सदनों में भी प्रमुख मुद्दा बना। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर बयान देने की मांग की। राज्यसभा में विपक्ष ने कहा कि छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए। मांग पूरी नहीं होने पर विपक्ष के कई दलों ने सदन से वॉकआउट भी किया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पूछा कि छात्रों के खिलाफ कथित पेलेट गन इस्तेमाल करने की अनुमति किसने दी। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग नहीं होना चाहिए। वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों को लेकर अलग-अलग स्तर पर जवाब दिए जा रहे हैं और जांच प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है। फिलहाल पेलेट गन विवाद राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बना हुआ है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल गृह मंत्री अमित शाह की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, जबकि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही इस पूरे विवाद की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।