कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधी रात को जारी किए गए वीडियो संदेश पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में संसद चलाना चाहती है, तो सबसे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करे और उसके बाद सदन में चर्चा के लिए आए। खरगे ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर जवाब मांग रहा है, लेकिन सरकार कार्रवाई से बच रही है। खरगे ने PM मोदी के वीडियो पर उठाए सवाल मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री का वीडियो जारी करना पर्याप्त नहीं है। उनका कहना था कि संसद में चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष लंबे समय से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग कर रहा है और जब तक इस पर फैसला नहीं होता, तब तक विवाद समाप्त होने की संभावना कम है। खरगे ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास करती है, तो उसे संसद के भीतर सभी सवालों का जवाब देना चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान को लेकर विपक्ष का रुख कांग्रेस की मांग क्या है? कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि शिक्षा मंत्रालय से जुड़े विवादों और हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी वजह से विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे या बर्खास्तगी की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि संसद की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है और सभी विषय नियमों के तहत उठाए जा सकते हैं। संसद में जारी गतिरोध संसद के मौजूदा सत्र में कई दिनों से हंगामे की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि सदन को सुचारु रूप से चलने दिया जाए। राज्यसभा और लोकसभा दोनों में कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है। ऐसे में राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संसद न चलने का आरोप लगा रहे हैं। PM मोदी के वीडियो को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि केवल वीडियो संदेश देने के बजाय सरकार को संसद में आकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार संवाद के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव जारी रहने की संभावना बनी हुई है। आगे क्या? अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार विपक्ष की मांगों पर कोई कदम उठाती है या नहीं। यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं, तो संसद की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान को लेकर विपक्ष का रुख सख्त बना हुआ है, जबकि सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।