पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानून पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी और सरकार को पहले यह बताना चाहिए कि अब तक हुए पेपर लीक मामलों में कितनी कार्रवाई हुई है। संजय राउत ने सरकार पर साधा निशाना संजय राउत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, लेकिन जमीन पर हालात नहीं बदले हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "PM मोदी ने बहुत बड़ा तीर मार लिया." लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस कानून से भविष्य में पेपर लीक पूरी तरह रुक जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। इससे लाखों युवाओं का समय और मेहनत बर्बाद हुई। ऐसे मामलों में दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए और पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। पेपर लीक कानून को लेकर क्या कहा? राउत ने कहा कि कानून बनाना अच्छी बात है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी उसका सही तरीके से पालन होना है। उनका कहना था कि अगर जांच एजेंसियां समय पर कार्रवाई करें और दोषियों को जल्द सजा मिले, तभी युवाओं का भरोसा लौटेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन राज्यों और संस्थाओं में पहले पेपर लीक की घटनाएं हुईं, वहां अब तक क्या कार्रवाई हुई। उनके अनुसार सरकार को सिर्फ नए कानून का प्रचार करने के बजाय पुराने मामलों का भी हिसाब देना चाहिए। युवाओं का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती संजय राउत ने कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। लाखों अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा रद्द होने या पेपर लीक होने से उनका भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, तकनीक का बेहतर इस्तेमाल किया जाए और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो। सरकार का पक्ष और राजनीतिक बहस केंद्र सरकार का कहना है कि नया पेपर लीक कानून परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और संगठित तरीके से होने वाले पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए लाया गया है। सरकार का दावा है कि इस कानून के जरिए दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं विपक्ष का कहना है कि सिर्फ कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं की निगरानी मजबूत नहीं होगी और जिम्मेदार लोगों पर समय पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल रहेगा। अब यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। एक तरफ सरकार नए कानून को बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में कितना बदलाव ला पाता है और युवाओं का भरोसा कितनी तेजी से वापस जीत पाता है।यह भी पढ़ें:- संसद में पेपर लीक पर बड़ा एक्शन! सरकार पेश करेगी नया बिल, विपक्ष का हंगामा तय