सावन माह वर्ष 2026 में 29 जुलाई 2026 (बुधवार) से शुरू होकर 27 अगस्त 2026 (गुरुवार) तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है और पहला सावन सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ेगा। यह महीना शिव भक्तों के लिए पूजा, व्रत और जलाभिषेक का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। सावन 2026 कब से शुरू होगा और कब तक रहेगा? हिंदू पंचांग के अनुसार सावन (श्रावण) मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है। वर्ष 2026 में सावन की शुरुआत 29 जुलाई से होगी और इसका समापन 27 अगस्त को होगा। इस पूरे महीने देशभर के शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करेंगे। सावन के सभी सोमवार की तारीखें सावन सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। कई श्रद्धालु पूरे महीने सोमवार का व्रत रखते हैं। सावन सोमवार 2026 की सूची पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026 दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026 तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026 चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026 इन दिनों शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। सावन में क्यों की जाती है भगवान शिव की पूजा? धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था, जिसके बाद देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि इस महीने श्रद्धा और विधि-विधान से शिव पूजा करने पर सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सावन में क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान? सावन के दौरान कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना शुभ माना जाता है। सावन में करें ये कार्य भगवान शिव का प्रतिदिन जलाभिषेक करें। बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल और गंगाजल अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा और रुद्राष्टकम का पाठ करें। जरूरतमंद लोगों की सहायता और दान-पुण्य करें। इन बातों का रखें ध्यान व्रत रखने वाले श्रद्धालु सात्विक भोजन करें। क्रोध, विवाद और नकारात्मक व्यवहार से बचें। पूजा में ताजा और स्वच्छ पूजन सामग्री का उपयोग करें। शिवलिंग पर तुलसी दल अर्पित न करें, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में इसे उचित नहीं माना गया है। कांवड़ यात्रा और मंदिरों में बढ़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़ सावन शुरू होने के साथ ही उत्तर भारत के कई राज्यों में कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ होती है। लाखों कांवड़िए पवित्र नदियों से जल लेकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, देवघर, उज्जैन, वाराणसी, बैद्यनाथ धाम, ओंकारेश्वर और देश के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना रहती है। प्रशासन भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन, स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई को लेकर विशेष तैयारियां करता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। निष्कर्ष सावन 2026 की शुरुआत 29 जुलाई से होगी और पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। भगवान शिव की आराधना के लिए यह महीना विशेष महत्व रखता है। यदि आप व्रत, जलाभिषेक या कांवड़ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो तिथियों की जानकारी पहले से रखना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना आपके लिए उपयोगी रहेगा।