अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 देशों से आने वाले कुछ आयातित उत्पादों पर नए टैरिफ की घोषणा की है। इस फैसले के तहत भारत और पाकिस्तान पर भी अलग-अलग दरों से शुल्क लगाया गया है, जिसका असर दोनों देशों के अमेरिका के साथ व्यापार और निर्यात पर पड़ सकता है।ट्रंप ने 17 देशों पर क्यों लगाया नया टैरिफ?अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नए टैरिफ का उद्देश्य घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करना, व्यापार घाटे को कम करना और अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देना है। प्रशासन का दावा है कि कुछ देशों के साथ व्यापार में असंतुलन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है।इन नए शुल्कों के दायरे में कई एशियाई, अफ्रीकी और अन्य देशों के चुनिंदा उत्पाद शामिल किए गए हैं। अलग-अलग देशों और उत्पादों के लिए टैरिफ की दरें भी अलग तय की गई हैं।भारत और पाकिस्तान पर कितना टैरिफ लगाया गया?घोषित सूची के अनुसार:भारत से आने वाले संबंधित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया गया है।पाकिस्तान से आने वाले संबंधित उत्पादों पर 19% टैरिफ लागू किया गया है।हालांकि, यह शुल्क सभी वस्तुओं पर नहीं बल्कि अधिसूचना में शामिल विशेष उत्पादों पर लागू होगा। अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन वस्तुओं को टैरिफ सूची में शामिल किया गया है और उनका व्यापारिक महत्व कितना है।किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर?विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रमुख निर्यात उत्पाद प्रभावित होते हैं तो भारत और पाकिस्तान के कुछ उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है। इनमें इंजीनियरिंग सामान, विनिर्माण उत्पाद, टेक्सटाइल, रसायन और अन्य निर्यात आधारित क्षेत्रों पर असर देखने को मिल सकता है।भारत के लिए अमेरिका प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क लागू होने पर कुछ उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।भारत और पाकिस्तान की क्या हो सकती है प्रतिक्रिया?भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद आगे की रणनीति स्पष्ट होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के माध्यम से समाधान तलाशने की कोशिश कर सकता है। वहीं पाकिस्तान भी अपने निर्यातकों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के बाद आवश्यक कदम उठा सकता है।व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता, तो प्रभावित देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के तहत उपलब्ध विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।वैश्विक व्यापार पर क्या पड़ेगा असर?ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से वैश्विक व्यापारिक माहौल में नई अनिश्चितता पैदा हो सकती है। यदि अन्य देश भी जवाबी कदम उठाते हैं, तो कई उद्योगों की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ते टैरिफ से अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत बढ़ सकती है और कई देशों के निर्यात पर दबाव आ सकता है।फिलहाल बाजार और निर्यातक अमेरिकी प्रशासन की विस्तृत अधिसूचना तथा संबंधित देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नए टैरिफ का वास्तविक आर्थिक प्रभाव कितना व्यापक होगा।