अमेरिका के 25 राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत समेत 60 देशों पर लगाए गए नए टैरिफ को अदालत में चुनौती दी है। राज्यों का कहना है कि ये टैरिफ कानून के दायरे से बाहर हैं और इनसे अमेरिकी उपभोक्ताओं, कारोबारियों और अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर कानूनी विवाद में फंस गई है। 25 डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाले राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर जो नया आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया है, वह कानून के अनुरूप नहीं है। राज्यों का कहना है कि इन टैरिफ का असर केवल विदेशी देशों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि अमेरिकी कंपनियों, छोटे कारोबारियों और आम लोगों पर भी पड़ेगा। उनका तर्क है कि आयात महंगा होने से कई जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई पर भी असर पड़ेगा। यह मुकदमा ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन लगातार व्यापारिक नीतियों को सख्त बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। हालांकि, विपक्षी राज्य सरकारों का कहना है कि राष्ट्रपति अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रंप के नए टैरिफ पर क्यों उठ रहे हैं सवाल? राज्यों का आरोप- पुराने टैरिफ को नए तरीके से लागू किया गया मुकदमे में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने पहले जिन टैरिफ को अदालत में कानूनी चुनौती मिलने के बाद झटका झेलना पड़ा था, अब लगभग उसी नीति को नए कानूनी आधार के साथ लागू करने की कोशिश की है। राज्यों का दावा है कि यह केवल पुराने टैरिफ को दोबारा लागू करने का तरीका है। ट्रंप प्रशासन ने इन नए टैरिफ के लिए 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का सहारा लिया है। प्रशासन का कहना है कि कुछ देशों ने जबरन श्रम (Forced Labor) से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की, इसलिए यह कदम उठाया गया है। दूसरी ओर, मुकदमा करने वाले राज्यों का कहना है कि इस आधार का इस्तेमाल केवल बहाना है और इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य पहले वाले व्यापक टैरिफ को फिर से लागू करना है। इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि राष्ट्रपति आपातकालीन आर्थिक शक्तियों वाले कानून (IEEPA) के तहत इतने व्यापक टैरिफ नहीं लगा सकते। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने नया कानूनी आधार अपनाया, जिसे अब अदालत में चुनौती दी गई है। भारत समेत 60 देशों पर क्या पड़ सकता है असर? भारत भी उन देशों में शामिल है जिन पर नए अमेरिकी टैरिफ लागू किए गए हैं। यदि ये टैरिफ लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं तो भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पाद महंगे हो सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अदालत का फैसला क्या आता है और अमेरिका की आगे की व्यापार नीति कैसी रहती है। अमेरिका के भीतर भी कई उद्योगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से कच्चा माल महंगा होगा, जिससे उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा क्योंकि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं। कोर्ट के फैसले पर टिकी सबकी नजर अब इस पूरे मामले की सुनवाई अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में होगी। अदालत यह तय करेगी कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए टैरिफ कानून के अनुरूप हैं या नहीं। यदि अदालत राज्यों की दलीलों से सहमत होती है तो ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लग सकता है और इन टैरिफ पर रोक भी लग सकती है। वहीं यदि अदालत प्रशासन के पक्ष में फैसला देती है तो भारत समेत 60 देशों पर लगाए गए नए आयात शुल्क जारी रह सकते हैं। इस मामले का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। भारत सहित कई देशों की नजर इस मुकदमे पर है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक व्यापार, आयात-निर्यात और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और ट्रंप प्रशासन की दलीलें यह तय करेंगी कि अमेरिका की नई व्यापार नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना तय है कि यह कानूनी लड़ाई वैश्विक व्यापार जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।