उद्धव ठाकरे गुट के नेता आनंद दुबे ने एंटी पेपर लीक बिल को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार छात्रों और किसानों की बात तभी सुनेगी, जब वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करें और पुलिस लाठीचार्ज या आंसू गैस का इस्तेमाल करे। एंटी पेपर लीक बिल पर क्या बोले आनंद दुबे? संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है। इसी बीच उद्धव ठाकरे गुट के नेता आनंद दुबे ने एंटी पेपर लीक बिल को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। आनंद दुबे ने कहा कि आज की Gen-Z को अपनी बात रखने के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे शर्म की बात बताया। उनके मुताबिक, सरकार को छात्रों की परेशानी सुनने के लिए उनके आंदोलन या दबाव का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार तभी जागती है, जब “कॉकरोच जैसी नकारात्मक शक्तियां” सामने आती हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सकारात्मक तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों की बात सरकार नहीं सुन सकती। छात्रों और किसानों को लेकर उठाए सवाल आनंद दुबे ने अपने बयान में छात्रों और किसानों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसानों और छात्रों की समस्याएं तब सुनी जाएंगी, जब उन पर लाठीचार्ज होगा या आंसू गैस के गोले छोड़े जाएंगे। उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा परीक्षा सिस्टम ठीक होना चाहिए। उनके बयान का मुख्य मुद्दा यह था कि सरकार को प्रदर्शन और टकराव की स्थिति बनने से पहले ही छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच लगातार बहस चल रही है। संसद में पेश हुआ पेपर लीक से जुड़ा बिल केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पेश किया। सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए पेपर लीक और परीक्षा में गलत तरीकों पर रोक लगाने के लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है। सरकार इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हित से जोड़कर देख रही है। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल नया कानून बनाना काफी नहीं है। छात्रों से जुड़े सवालों और हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए। 'कॉकरोच जैसी नकारात्मक शक्तियां' का मतलब क्या? आनंद दुबे के बयान में यह शब्द राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर सामने आया। उनका कहना था कि सरकार को नकारात्मक या टकराव वाली स्थिति बनने का इंतजार नहीं करना चाहिए। छात्रों, किसानों और आम लोगों की समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से भी सुना जाना चाहिए। इस पूरे मामले में अब सरकार और विपक्ष के बीच बहस आगे बढ़ने की संभावना है। पेपर लीक रोकने वाले नए कानून पर संसद में चर्चा के साथ छात्रों से जुड़े दूसरे सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं। यह भी पढ़ें- पेपर लीक कानून पर संजय राउत का तीखा बयान, बोले- पहले पुराने मामलों का हिसाब दें